विस्तृत उत्तर
आत्मदेव का निवास तुंगभद्रा नदी के तट पर बताया गया है। वहाँ पूर्वकाल में एक अनुपम नगर बसा था। उस नगर में सभी वर्णों के लोग अपने-अपने धर्म का आचरण करते थे और सत्य तथा सत्कर्म में लगे रहते थे। इसी नगर में आत्मदेव नामक ब्राह्मण रहता था, जो वेदों और शास्त्रीय कर्मों का ज्ञाता था। इस स्थान-परिचय से कथा का वातावरण स्पष्ट होता है: नगर धार्मिक था, लोग धर्मपालन करते थे, फिर भी आत्मदेव के निजी जीवन में संतान का अभाव उसे दुखी कर रहा था। यह विवरण आत्मदेव की आगे आने वाली संतान-कथा का आधार बनता है, क्योंकि उसी नगर और उसी धार्मिक वातावरण में उनके निजी दुख का आरंभ दिखाया गया है।
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