विस्तृत उत्तर
आत्मदेव का दुख संतान-अभाव से जुड़ा था। कहा गया है कि आत्मदेव और धुंधुली के पास धन, भोग-सामग्री और सुंदर घर-द्वार थे, पर उससे उन्हें सुख नहीं था। आयु बढ़ने पर उन्होंने संतान के लिये अनेक पुण्यकर्म आरंभ किए और दीन-दुखियों को गौ, भूमि, सोना और वस्त्र दान किए। धर्ममार्ग में आधा धन लगा देने पर भी उन्हें पुत्र या पुत्री नहीं मिली। इस कारण आत्मदेव बहुत चिंतित रहने लगे। बाद में वे कहते हैं कि संतानहीन जीवन, घर, धन और कुल सब धिक्कार के योग्य हैं। उनकी गाय बाँझ हो जाती थी, लगाए हुए वृक्ष फल-फूल नहीं देते थे और घर का फल भी शीघ्र सड़ जाता था; इससे उनका दुख और बढ़ गया।
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