विस्तृत उत्तर
कथा का अंतिम भाग आत्मदेव की साधना और फल बताता है। गोकर्ण के उपदेश से प्रभावित होकर आत्मदेव घर छोड़कर वन चले गए। यद्यपि उनकी आयु उस समय साठ वर्ष हो चुकी थी, फिर भी उनकी बुद्धि दृढ़ थी। वन में उन्होंने रात-दिन भगवान की सेवा-पूजा की। साथ ही उन्होंने नियमपूर्वक भागवत के दशम स्कंध का पाठ किया। पाठ का फल यह बताया गया कि उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के चरण प्राप्त किए। इसलिए दशम स्कंध पाठ को आत्मदेव की मुक्ति और कृष्ण-प्राप्ति से जोड़ा गया है। यह फल गोकर्ण के वैराग्य, भजन, साधुसेवा और कथा-रस वाले उपदेश के पालन के बाद आता है।
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