विस्तृत उत्तर
गोकर्ण और धुंधुकारी की कथा का आरंभ भागवत सप्ताह की महिमा सिद्ध करने के लिये किया गया है। सनकादि कहते हैं कि वे एक प्राचीन इतिहास सुनाएंगे जिसके श्रवण से पापों की हानि होती है। कथा तुंगभद्रा नदी के तट पर बसे नगर से शुरू होती है, जहाँ आत्मदेव नामक वेदज्ञ ब्राह्मण अपनी पत्नी धुंधुली के साथ रहता था। संतान न होने से वह दुखी था। संन्यासी से फल मिलने, धुंधुली की चाल, धुंधुकारी के जन्म और गाय से गोकर्ण के जन्म की कथा इसी कथा में आती है। आगे धुंधुकारी दुष्ट और गोकर्ण ज्ञानी बताए गए हैं। कथा का अंत गोकर्ण के वैराग्य उपदेश और आत्मदेव की कृष्ण-प्राप्ति से होता है।
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