विस्तृत उत्तर
आत्मदेव को कृष्ण की प्राप्ति गोकर्ण के वैराग्य उपदेश का पालन करने से हुई। गोकर्ण ने उन्हें शरीर-अभिमान, पत्नी-पुत्र की ममता और पुत्र-मोह छोड़ने को कहा। उन्होंने संसार को क्षणभंगुर देखकर वैराग्य अपनाने, भगवान के भजन में लगने, साधुजन की सेवा करने, काम-तृष्णा हटाने और भगवान की कथा के रस का पान करने का मार्ग बताया। आत्मदेव अपने पुत्र के वचन से प्रभावित होकर घर छोड़कर वन चले गए। उस समय वे साठ वर्ष के थे, फिर भी उनकी बुद्धि दृढ़ थी। वन में उन्होंने रात-दिन भगवान की सेवा-पूजा की और नियमपूर्वक भागवत के दशम स्कंध का पाठ किया। इसी साधन से उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के चरणों को प्राप्त किया।
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