विस्तृत उत्तर
धुंधुली आत्मदेव ब्राह्मण की पत्नी के रूप में आती है। वह कुलीन और सुंदर कही गई है, पर उसके स्वभाव में कई दोष बताए गए हैं। वह अपनी बात पर अड़ने वाली, लोक-वार्ता में रुचि रखने वाली, क्रूर, बहुत बोलने वाली, गृहकार्य में निपुण, कृपण और झगड़ालू थी। जब आत्मदेव उसे संन्यासी से मिला पुत्रदायक फल देता है, तब वह गर्भ, प्रसव, नियम और बाल-पालन के कष्टों से डरकर फल खाने से बचती है। वह पति से झूठ बोलती है और अपनी बहन की योजना मानकर फल गाय को खिला देती है। इसी से आगे धुंधुकारी और गोकर्ण के जन्म की घटना घटती है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





