विस्तृत उत्तर
आत्मदेव को सात जन्म तक पुत्र न मिलना उनके प्रारब्ध से जोड़ा गया है। संन्यासी योगी थे और उन्होंने आत्मदेव के ललाट की रेखाएँ देखकर सारा वृत्तांत जान लिया। फिर वे कहते हैं कि उन्होंने आत्मदेव का प्रारब्ध देख लिया है और सात जन्म तक उन्हें पुत्र किसी भी प्रकार नहीं हो सकता। यह कथन आत्मदेव के अत्यधिक दुख के बीच आता है, इसलिए संन्यासी उन्हें केवल भविष्यवाणी नहीं बताते, बल्कि साथ में यह भी कहते हैं कि पुत्र-प्राप्ति का मोह छोड़ो, विवेक अपनाओ और संसार की वासना छोड़ो। यही स्पष्ट है कि आत्मदेव का पुत्र-अभाव साधारण प्रयास की कमी से नहीं, प्रारब्ध की प्रबलता से था।
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