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प्रारब्ध — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 5 प्रश्न

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कर्म सिद्धांत

अच्छे कर्म करने के बावजूद दुख क्यों मिलता है?

पूर्व जन्मों के प्रारब्ध कर्म का फल वर्तमान में दुख के रूप में आता है। अच्छे कर्मों का फल विलंब से मिलता है। गीता कहती है 'गहना कर्मणो गतिः' — कर्म की गति अत्यंत गहन है। दुख आत्मिक विकास का माध्यम भी है।

कर्मफलदुखप्रारब्ध
कर्म सिद्धांत

पूर्व जन्म के कर्मों का पता कैसे चलता है?

सामान्य मनुष्य पूर्व कर्म नहीं जान सकता (गीता 4.5)। संकेत: वर्तमान परिस्थितियाँ (प्रारब्ध), जन्म कुंडली (ज्योतिष), गहन ध्यान (योगसूत्र 3.18), सहज प्रवृत्तियाँ। सबसे महत्वपूर्ण — वर्तमान कर्म पर ध्यान दें।

पूर्व जन्मकर्मप्रारब्ध
कर्म सिद्धांत

संचित कर्म, प्रारब्ध कर्म और क्रियमाण कर्म में क्या अंतर है?

संचित = सभी जन्मों के कर्मों का भंडार। प्रारब्ध = संचित का वह भाग जो वर्तमान जीवन में फल दे रहा है (भाग्य)। क्रियमाण = वर्तमान में किए जा रहे कर्म (पुरुषार्थ)। क्रियमाण → संचित → प्रारब्ध — यह चक्र मोक्ष तक चलता है।

संचित कर्मप्रारब्धक्रियमाण
सनातन सिद्धांत

कर्म सिद्धांत क्या है?

कर्म = विचार + वाणी + कर्म। कोई कर्म नष्ट नहीं होता। तीन प्रकार: संचित (पुराने कर्मों का भंडार), प्रारब्ध (इस जन्म का भोग/भाग्य), आगामी (वर्तमान कर्म — भविष्य बदलते हैं)। निष्काम कर्म = मुक्ति। ज्ञान से कर्म नष्ट होते हैं (गीता 4.37)।

कर्मकर्मफलसंचित कर्म
कर्म सिद्धांत

प्रारब्ध कर्म को बदला जा सकता है या नहीं?

मंद प्रारब्ध पुरुषार्थ से बदला जा सकता है, तीव्र गुरु कृपा से टल सकता है, पर दृढ़ प्रारब्ध भोगना ही पड़ता है। भक्ति/ज्ञान से तीव्रता कम हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण — वर्तमान कर्म (क्रियमाण) से भविष्य सुधारें।

प्रारब्धभाग्य बदलनापुरुषार्थ

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।