विस्तृत उत्तर
जलाभिषेक के फलों का वर्णन शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता में विस्तार से मिलता है।
शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 12) के अनुसार लाभ
1पाप-नाश
जलाभिषेकेण शिवस्य पापं नश्यति।' — शिव पर जलाभिषेक से समस्त पाप नष्ट होते हैं।
2रोग-निवारण
जल = सोम (चंद्रमा का तत्त्व)। शिवलिंग पर जल चढ़ाने से रोग-शांति होती है, विशेषतः ज्वर, पित्त-रोग।
3मनोकामना-पूर्ति
स्कंद पुराण: नित्य जलाभिषेक से भगवान शिव की विशेष कृपा — धन, पुत्र, स्वास्थ्य, मोक्ष — सभी मनोकामनाएँ पूर्ण।
4ग्रह-शांति
ज्योतिष शास्त्र: शनि, राहु, केतु की पीड़ा में जलाभिषेक विशेष लाभदायक।
5पितृ-तर्पण
गंगाजल से शिवाभिषेक करने पर पितरों को शांति मिलती है।
6मोक्ष
लिंग पुराण: जो व्यक्ति जीवन-भर नित्य शिवलिंग पर जल अर्पित करता है, उसे मृत्यु के बाद शिव-लोक की प्राप्ति होती है।
लाभ-सारणी (विभिन्न अभिषेक द्रव्य)
- ▸जल — पाप-नाश, रोग-शांति
- ▸दूध — पुत्र-प्राप्ति, आयुष्य
- ▸घी — मोक्ष
- ▸शहद — वाक्-शक्ति, सौंदर्य
- ▸गंगाजल — सर्व-कामना-सिद्धि





