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शिव पूजा📜 शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता), लिंग पुराण, स्कंद पुराण2 मिनट पठन

जलाभिषेक से क्या लाभ होते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

जलाभिषेक लाभ: पाप-नाश (शिव पुराण: 'जलाभिषेकेण पापं नश्यति')। रोग-निवारण (जल = सोम-तत्त्व)। मनोकामना-पूर्ति (स्कंद पुराण)। ग्रह-शांति (शनि/राहु/केतु)। पितृ-तर्पण। मोक्ष (लिंग पुराण: शिव-लोक प्राप्ति)।

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विस्तृत उत्तर

जलाभिषेक के फलों का वर्णन शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता में विस्तार से मिलता है।

शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता, अध्याय 12) के अनुसार लाभ

1पाप-नाश

जलाभिषेकेण शिवस्य पापं नश्यति।' — शिव पर जलाभिषेक से समस्त पाप नष्ट होते हैं।

2रोग-निवारण

जल = सोम (चंद्रमा का तत्त्व)। शिवलिंग पर जल चढ़ाने से रोग-शांति होती है, विशेषतः ज्वर, पित्त-रोग।

3मनोकामना-पूर्ति

स्कंद पुराण: नित्य जलाभिषेक से भगवान शिव की विशेष कृपा — धन, पुत्र, स्वास्थ्य, मोक्ष — सभी मनोकामनाएँ पूर्ण।

4ग्रह-शांति

ज्योतिष शास्त्र: शनि, राहु, केतु की पीड़ा में जलाभिषेक विशेष लाभदायक।

5पितृ-तर्पण

गंगाजल से शिवाभिषेक करने पर पितरों को शांति मिलती है।

6मोक्ष

लिंग पुराण: जो व्यक्ति जीवन-भर नित्य शिवलिंग पर जल अर्पित करता है, उसे मृत्यु के बाद शिव-लोक की प्राप्ति होती है।

लाभ-सारणी (विभिन्न अभिषेक द्रव्य)

  • जल — पाप-नाश, रोग-शांति
  • दूध — पुत्र-प्राप्ति, आयुष्य
  • घी — मोक्ष
  • शहद — वाक्-शक्ति, सौंदर्य
  • गंगाजल — सर्व-कामना-सिद्धि
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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण (कोटिरुद्र संहिता), लिंग पुराण, स्कंद पुराण
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