विस्तृत उत्तर
हां — मंत्र जप फल दूसरों को अर्पित कर सकते हैं:
विधि
- 1जप पूर्व संकल्प: 'मैं [मंत्र] का [संख्या] जप [व्यक्ति नाम] के कल्याण/रोग मुक्ति/शांति हेतु करता हूं।'
- 2जप पूर्ण बाद: 'इस जप का सम्पूर्ण फल [व्यक्ति] को अर्पित करता हूं। ॐ।'
किसे
- ▸जीवित व्यक्ति — रोग/संकट में।
- ▸दिवंगत — पितृ शांति हेतु।
- ▸सम्पूर्ण विश्व — 'सर्वे भवन्तु सुखिनः'।
शास्त्रीय: बौद्ध/हिंदू दोनों = 'पुण्य दान' मान्य। गीता: 'कर्मफल त्याग' = सर्वोत्तम।
लाभ: अर्पित करने वाले को भी पुण्य = क्षीण नहीं होता, बल्कि बढ़ता है। निःस्वार्थ = अधिक फल।





