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मंत्र जप ज्ञान📜 भक्ति दर्शन, कर्म सिद्धांत1 मिनट पठन

मंत्र जप का फल किसी और को अर्पित कर सकते हैं क्या?

संक्षिप्त उत्तर

हां। संकल्प: '[व्यक्ति] कल्याण हेतु।' जीवित/दिवंगत/सम्पूर्ण विश्व। 'पुण्य दान' = मान्य (हिंदू+बौद्ध)। अर्पित = पुण्य बढ़ता (क्षीण नहीं)। निःस्वार्थ = अधिक।

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विस्तृत उत्तर

हां — मंत्र जप फल दूसरों को अर्पित कर सकते हैं:

विधि

  1. 1जप पूर्व संकल्प: 'मैं [मंत्र] का [संख्या] जप [व्यक्ति नाम] के कल्याण/रोग मुक्ति/शांति हेतु करता हूं।'
  2. 2जप पूर्ण बाद: 'इस जप का सम्पूर्ण फल [व्यक्ति] को अर्पित करता हूं। ॐ।'

किसे

  • जीवित व्यक्ति — रोग/संकट में।
  • दिवंगत — पितृ शांति हेतु।
  • सम्पूर्ण विश्व — 'सर्वे भवन्तु सुखिनः'।

शास्त्रीय: बौद्ध/हिंदू दोनों = 'पुण्य दान' मान्य। गीता: 'कर्मफल त्याग' = सर्वोत्तम।

लाभ: अर्पित करने वाले को भी पुण्य = क्षीण नहीं होता, बल्कि बढ़ता है। निःस्वार्थ = अधिक फल।

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शास्त्रीय स्रोत
भक्ति दर्शन, कर्म सिद्धांत
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