विस्तृत उत्तर
अजपा जप = बिना प्रयास/स्वतः चलने वाला जप:
क्या है: प्रत्येक श्वास स्वतः मंत्र जप कर रही है — 'सोऽहम्' (So = श्वास अंदर, Ham = बाहर)। 'सो' = वह (ब्रह्म), 'अहम्' = मैं → 'वह मैं हूं'। प्रतिदिन ~21,600 श्वास = 21,600 'सोऽहम्' जप।
कैसे
- 1शांत बैठें, आंखें बंद।
- 2श्वास अंदर = 'सो' सुनें (कल्पना)।
- 3श्वास बाहर = 'हम्' सुनें।
- 4जबरदस्ती नहीं — श्वास पर ध्यान = स्वतः 'सोऽहम्'।
- 5नियमित अभ्यास = 24×7 अजपा → सोते-जागते।
सर्वोच्च: अजपा = मानस जप से भी ऊपर। कोई माला/आसन/नियम नहीं — सदा चल रहा है। 'जिसने अजपा सिद्ध कर ली = मोक्ष निश्चित।'





