विस्तृत उत्तर
आत्मदेव फल लाकर धुंधुली को देते हैं और स्वयं कहीं चले जाते हैं। धुंधुली कुटिल स्वभाव की थी। वह अपनी सखी से रोकर कहती है कि वह फल नहीं खाएगी, क्योंकि फल खाने से गर्भ रहेगा और पेट बढ़ेगा। उसे डर था कि वह कम खा पाएगी, शक्ति घटेगी और घर का काम कैसे होगा। वह डाकुओं के आक्रमण जैसी स्थिति में गर्भवती स्त्री के भाग न पाने, गर्भ के बाहर न आने, प्रसव में मृत्यु और प्रसव-पीड़ा जैसी आशंकाएँ भी गिनाती है। उसे सत्य-शौच आदि नियम कठिन लगते हैं और बालक के पालन में कष्ट दिखाई देता है। इन्हीं कुतर्कों के कारण उसने फल नहीं खाया और पति से झूठ बोल दिया कि फल खा लिया।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





