विस्तृत उत्तर
गणेश पुराण और मुद्गल पुराण में गणेश जी के प्रिय भोगों का विस्तृत वर्णन है:
गणेश जी का सर्वप्रिय भोग — मोदक
मोदक (मोदम् = आनंद; क = देने वाला) गणेश जी का सर्वाधिक प्रिय भोग है। गणेश पुराण में कहा गया है — 'मोदकप्रिय गणेशः' — मोदक प्रिय हैं गणेश जी को।
मोदक के प्रकार
- 1उकडिचे मोदक (पारंपरिक महाराष्ट्रीय): चावल के आटे की पाली में नारियल-गुड़ की भरावन — यह सर्वश्रेष्ठ
- 2तिल मोदक: तिल और गुड़
- 3नारियल मोदक: नारियल और गुड़
- 4बेसन लड्डू: गणेश चतुर्थी पर विशेष
गणेश जी के प्रिय भोग (विस्तृत सूची)
- 1मोदक — सर्वप्रिय (21 मोदक अर्पण श्रेष्ठ)
- 2लड्डू (मोतीचूर या बेसन) — अत्यंत प्रिय
- 3केला — विशेष प्रिय; गणेश जी को केला अर्पण शुभ
- 4दूर्वा (दूब) — वैसे यह फूल है परंतु भोग समान महत्व — 21 दूर्वा अनिवार्य
- 5पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
- 6खीर — दूध और चावल की
- 7पंजीरी — आटा, घी, शक्कर
- 8गुड़ — शुद्ध गुड़
- 9नारियल — श्रीफल
- 10जामुन — गणेश जी को जामुन प्रिय है (मुद्गल पुराण)
- 11शमी वृक्ष के पत्ते — शमीपत्र
21 मोदक का महत्व
गणेश पुराण में 21 मोदक अर्पण का विशेष विधान है:
> 'एकविंशतिमोदकैः पूजितो गणनायकः।
> सर्वानिष्टान् परिहरेत् प्रयच्छेत् च सुखं नरम्॥'
— 21 मोदकों से पूजित गणेश जी सभी कष्ट हरते हैं।
चतुर्थी और गणेश चतुर्थी पर विशेष भोग
- ▸सुबह: पंचामृत
- ▸मध्यान्ह: 21 मोदक, लड्डू
- ▸सायंकाल: खीर
वर्जित भोग
- ▸तुलसी — गणेश पूजा में तुलसी वर्जित
- ▸तीखा और कड़वा भोजन
- ▸नीले या काले पुष्प — कुछ परंपराओं में





