विस्तृत उत्तर
नहीं — जूठा (एंठा/उच्छिष्ट) भोजन भगवान को अर्पित करना सर्वथा वर्जित है।
कारण
- 1शुद्धता — भगवान को शुद्ध, ताजा, अस्पर्शित भोजन ही अर्पित होता है।
- 2नैवेद्य नियम — भोग बनाते/चढ़ाते समय चखना भी वर्जित (प्रश्न 493)।
- 3सम्मान — जूठा = अपमान। भगवान को सर्वश्रेष्ठ ही अर्पित।
अपवाद (विशेष भक्त कथाएं)
- ▸शबरी — झूठे बेर राम ने स्वीकार किए (रामायण) — यह भक्ति की चरम अवस्था; सामान्य नियम नहीं।
- ▸विदुर की पत्नी — केले के छिलके कृष्ण ने खाए।
- ▸ये कथाएं भक्ति भाव की महिमा दर्शाती हैं — सामान्य पूजा विधि में जूठा कभी स्वीकार्य नहीं।
नियम: भोग पहले → फिर प्रसाद बने → फिर ग्रहण करें। क्रम उल्टा नहीं।





