📖
विस्तृत उत्तर
गौघृत (देसी घी) से अभिषेक (चतुर्थ अध्याय / मैत्र सूक्त के साथ):
घी प्राण-ऊर्जा और अग्नि का परिचायक है। निरंतर घृत की धारा अर्पित करने से:
— वंश का विस्तार होता है
— शारीरिक तेज में वृद्धि होती है
— मोक्ष की प्राप्ति होती है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





