विस्तृत उत्तर
गौघृत (देसी घी) से अभिषेक (चतुर्थ अध्याय / मैत्र सूक्त के साथ):
घी प्राण-ऊर्जा और अग्नि का परिचायक है। निरंतर घृत की धारा अर्पित करने से:
— वंश का विस्तार होता है
— शारीरिक तेज में वृद्धि होती है
— मोक्ष की प्राप्ति होती है।
घी (गौघृत) से अभिषेक: वंश का विस्तार, शारीरिक तेज में वृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति।
गौघृत (देसी घी) से अभिषेक (चतुर्थ अध्याय / मैत्र सूक्त के साथ):
घी प्राण-ऊर्जा और अग्नि का परिचायक है। निरंतर घृत की धारा अर्पित करने से:
— वंश का विस्तार होता है
— शारीरिक तेज में वृद्धि होती है
— मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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