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पद्म पुराण⏱ 5 मिनट पठन

यमुना ने यमराज को क्या किया?

यमुना ने द्वितीया तिथि पर अपने भाई यमराज को स्वगृहे यानी अपने घर में आदरपूर्वक भोजन कराया और उनकी अर्चना की।

संक्षिप्त उत्तर

यमुना ने द्वितीया तिथि पर अपने भाई यमराज को स्वगृहे यानी अपने घर में आदरपूर्वक भोजन कराया और उनकी अर्चना की। पद्म पुराण का श्लोक है यमो यमुनया पूर्वं भोजितः स्वगृहेऽर्चिता। यमुना और यमराज दोनों सूर्य-देव की सन्तान हैं। यमुना के इस भ्रातृ-प्रेम से यमराज अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने द्वितीया तिथि को महोत्सर्ग घोषित किया।

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विस्तृत उत्तर

यमुना ने यमराज को अपने घर बुलाकर आदरपूर्वक भोजन कराया, उनकी अर्चना की, और उन्हें प्रसन्न किया। शास्त्रीय आधार के अनुसार पद्म पुराण के अनुसार यमो यमुनया पूर्वं भोजितः स्वगृहेऽर्चिता। यानी यमराज को यमुना ने पूर्व में अपने घर में भोजन कराया और उनकी अर्चना की।

यमुना और यमराज का परिचय इस प्रकार है। यमुना और यमराज दोनों सूर्य-देव के पुत्र-पुत्री हैं। सूर्य-देव की पत्नी संज्ञा से यमराज, यमुना, और शनि जन्मे। यमुना एक पवित्र नदी भी हैं, जो हिमालय से निकलकर प्रयागराज में गंगा से मिलती हैं। यमराज धर्म के देवता और मृत्यु के स्वामी हैं।

यमुना द्वारा यमराज को किए गए पाँच कार्य इस प्रकार हैं। पहला कार्य है स्वगृहे आमंत्रण। यमुना ने यमराज को अपने घर यानी स्वगृहे में बुलाया। भाई को घर बुलाना प्रेम और आदर का पहला लक्षण है। दूसरा कार्य है भोजन कराना। यमुना ने यमराज को भोजितः यानी भोजन कराया। यह भ्रातृ-सेवा का प्रत्यक्ष रूप है।

तीसरा कार्य है अर्चना करना। यमुना ने यमराज की अर्चिता यानी अर्चना की। अर्चना का अर्थ है पूजा करना, तिलक लगाना, और सम्मान देना। यह दर्शाता है कि यमुना ने भाई को देव-स्वरूप मानकर पूजा। चौथा कार्य है प्रेम और श्रद्धा। यमुना ने यह सब भ्रातृ-प्रेम और श्रद्धा से किया, किसी भय से नहीं। पाँचवाँ कार्य है द्वितीया तिथि पर करना। यह सब उन्होंने द्वितीया तिथि पर किया, जो इस तिथि को विशेष बना गया।

यमुना के इस सत्कार का परिणाम अत्यंत शुभ था। यमराज इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने दो विशेष घोषणाएँ कीं। पहली घोषणा है महोत्सर्ग। यमराज ने द्वितीया तिथि को महोत्सर्ग यानी महान उत्सव घोषित किया। दूसरी घोषणा है नरकीय जीवों की तृप्ति। नारकीयाश्च तर्पिताः यानी नरक में यातना भोग रहे जीव भी इस तिथि पर तृप्ति पाते हैं।

यमुना के भोजन में क्या था, इसका भी शास्त्रीय आधार है। यमुना ने यमराज को पायस यानी खीर का भोजन कराया था। खीर में मधु यानी शहद और घृत यानी घी मिलाया था। यह सात्विक, पवित्र, और स्वादिष्ट भोजन था। शास्त्रों में प्रियजनों को खीर खिलाना सर्वोच्च सत्कार माना जाता है।

यमुना का यमराज के प्रति भाव विशेष था। यमुना एक शान्त, पवित्र, और प्रेमपूर्ण देवी हैं। उनके जल में स्नान से पापों का नाश होता है। उन्होंने यमराज को भाई के रूप में, देव के रूप में, और परिजन के रूप में सम्मान दिया। यह तीन स्तरीय सम्मान अत्यंत विशेष था।

यमराज की प्रतिक्रिया भी विशेष थी। यमराज मृत्यु के देवता हैं, जो सामान्यतः कठोर और गम्भीर हैं। परंतु यमुना के प्रेम से वे भी द्रवित हो गए। उनका हृदय भाई के रूप में मृदु हो गया, और उन्होंने सम्पूर्ण द्वितीया तिथि को महोत्सव घोषित कर दिया।

इस कथा का सांस्कृतिक प्रभाव अत्यंत व्यापक है। भाई-दूज का पर्व इसी कथा पर आधारित है। आज भी बहनें अपने भाइयों को घर बुलाती हैं, तिलक करती हैं, भोजन कराती हैं, और उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं। यह यमुना की परम्परा का आधुनिक रूप है।

इस कथा का श्राद्ध से सम्बन्ध यह है कि द्वितीया तिथि पर यमराज का विशेष आधिपत्य यमुना के इसी प्रेम के कारण है। जब पितृ पक्ष की द्वितीया पर श्राद्ध किया जाता है, तो यमराज की विशिष्ट प्रसन्नता के कारण पितरों को विशेष तृप्ति मिलती है।

यमुना और यमराज की कथा का दार्शनिक संदेश अत्यंत गहरा है। यह दर्शाता है कि प्रेम में इतनी शक्ति है कि वह मृत्यु के देवता को भी उदार बना सकती है। जब एक बहन ने अपने भाई को प्रेम से भोजन कराया, तो नरक के जीव भी तृप्त हो गए। यह प्रेम की सर्वव्यापी शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

इस कथा का पितृ-श्राद्ध से जोड़ने पर संदेश यह है। जैसे यमुना के भ्रातृ-प्रेम से यमराज प्रसन्न हुए, उसी प्रकार वंशज के पितृ-प्रेम और श्रद्धा से भी यमराज प्रसन्न होते हैं। श्राद्ध एक ऐसा ही प्रेम-अर्पण है, जो मृत पितरों के प्रति किया जाता है। शास्त्रीय आधार के रूप में पद्म पुराण कार्तिक माहात्म्य इस सिद्धांत का प्रमुख प्रामाणिक स्रोत है। निष्कर्षतः यमुना ने द्वितीया तिथि पर यमराज को अपने घर में आदरपूर्वक भोजन कराया, उनकी अर्चना की, और भ्रातृ-प्रेम का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रसन्न यमराज ने द्वितीया को महोत्सर्ग घोषित किया, और नरक के जीवों को भी तृप्ति दी। तब से द्वितीया यमराज की विशेष तिथि बन गई।

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