विस्तृत उत्तर
ग्रहण (सूर्य/चन्द्र) काल में मंत्र जप का प्रभाव सामान्य समय से लाख गुना (1,00,000 गुना) बढ़ जाता है — यह सर्वप्रचलित शास्त्रीय मान्यता है।
शास्त्रीय उक्ति
ग्रहणे यत्कृतं दानं जपहोमार्चनादिकम्।
लक्षगुणमवाप्नोति तस्माद् ग्रहणे समाचरेत्॥'
— ग्रहण में दान, जप, होम, अर्चना = लक्ष (लाख) गुना फल। अतः ग्रहण में साधना अवश्य करें।
विशिष्ट गुणन (कुछ ग्रन्थों में)
- ▸सूर्य ग्रहण = लाख गुना।
- ▸चन्द्र ग्रहण = लाख गुना (कुछ में 10 हजार गुना)।
- ▸खग्रास (पूर्ण) ग्रहण = सर्वाधिक।
- ▸खण्डग्रास (आंशिक) = कम किन्तु शुभ।
क्यों इतना प्रभाव
- ▸ग्रहण = ब्रह्माण्डीय ऊर्जा का विशेष प्रवाह (राहु-केतु सक्रिय)।
- ▸वातावरण की ऊर्जा असामान्य → मंत्र कम्पन (vibrations) अधिक तीव्र।
- ▸ग्रहण स्पर्श से मोक्ष तक = पवित्रतम काल।
कौन से मंत्र
गायत्री (सर्वोत्तम), महामृत्युंजय, इष्ट मंत्र, सूर्य/चन्द्र मंत्र।
ध्यान दें: 'लाख गुना' = शास्त्रीय अलंकार/प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति — 'अत्यन्त अधिक' का सूचक। शाब्दिक गणित नहीं। मूल भावना: ग्रहण = साधना का सर्वोत्तम अवसर, व्यर्थ न गँवाएँ।





