विस्तृत उत्तर
इस प्रक्रिया में, पुरोहित या साधक विभिन्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए अपनी उंगलियों से शिवलिंग के विभिन्न भागों का स्पर्श करते हैं।
इस स्पर्श के माध्यम से वे उस मंत्र की अधिष्ठात्री चेतना और ऊर्जा को शिवलिंग के उस अंग-विशेष पर स्थापित करते हैं।
यह एक प्रकार से शिवलिंग पर भगवान शिव के सूक्ष्म, नादमय शरीर का निर्माण करने जैसा है। उदाहरण के लिए, शिव के पंचमुखों से संबंधित मंत्रों (जैसे — ॐ सद्योजाताय नमः, ॐ वामदेवाय नमः) का उच्चारण करते हुए शिवलिंग के पश्चिम, उत्तर आदि भागों का स्पर्श किया जाता है।
यही 'मंत्र प्रवेश' की वास्तविक तांत्रिक विधि है, जिसमें मंत्रों द्वारा एक दिव्य खाका तैयार किया जाता है।





