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शिव मंत्र📜 मंत्र शास्त्र, तंत्र शास्त्र, कर्मकांड विधि ग्रंथ2 मिनट पठन

शिव मंत्र जप से पहले न्यास विधि कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

न्यास = शरीर के अंगों में शिव/मंत्र शक्ति की स्थापना। 'न्यास बिना जप निष्फल' — शास्त्र वचन। करन्यास: उंगलियों पर बीजाक्षर न्यस्त करें। षडंग न्यास: हृदय, शिर, शिखा, कवच, नेत्र, अस्त्र पर स्पर्श। पंचाक्षरी न्यास: न-मः-शि-वा-य = पंचतत्व-पंचांग पर। गुरु से सीखना सर्वोत्तम।

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विस्तृत उत्तर

न्यास का अर्थ है 'स्थापना' — अपने शरीर के विभिन्न अंगों में इष्टदेवता (शिव) और मंत्र शक्ति की स्थापना करना। शास्त्रों में कहा गया है: 'न्यास विना जपं प्राहुरासुरं विफलं बुधाः' — न्यास के बिना जप आसुरी और निष्फल होता है।

शिव मंत्र जप से पूर्व न्यास के प्रकार

1ऋष्यादि न्यास (विनियोग)

सबसे पहले मंत्र का विनियोग बोलें — ऋषि, छंद, देवता, बीज, शक्ति और कीलक का उच्चारण करते हुए क्रमशः शिर, मुख, हृदय, गुह्य, पाद और नाभि का स्पर्श करें।

2करन्यास (हाथ की उंगलियों पर न्यास)

दोनों हाथों की उंगलियों पर मंत्र के बीजाक्षर न्यस्त किए जाते हैं:

  • अंगूठे — 'अंगुष्ठाभ्यां नमः' (दोनों अंगूठे आपस में मिलाएं)
  • तर्जनी — 'तर्जनीभ्यां नमः'
  • मध्यमा — 'मध्यमाभ्यां नमः'
  • अनामिका — 'अनामिकाभ्यां नमः'
  • कनिष्ठा — 'कनिष्ठिकाभ्यां नमः'
  • करतल-करपृष्ठ — 'करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः'

3हृदयादि/षडंग न्यास (छह अंगों पर न्यास)

दाहिने हाथ की पांचों उंगलियों से निम्न अंगों का स्पर्श करें:

  • 'हृदयाय नमः' — हृदय स्पर्श
  • 'शिरसे स्वाहा' — मस्तक स्पर्श
  • 'शिखायै वषट्' — शिखा (चोटी) स्पर्श
  • 'कवचाय हुम्' — दोनों भुजाओं को क्रास कर स्पर्श
  • 'नेत्रत्रयाय वौषट्' — तीन नेत्रों (दो नेत्र + भ्रूमध्य) का स्पर्श
  • 'अस्त्राय फट्' — तालि बजाएं

4शिव पंचाक्षरी (ॐ नमः शिवाय) का सरल न्यास

  • 'न' — पृथ्वी तत्व — पैरों पर
  • 'मः' — जल तत्व — जंघाओं पर
  • 'शि' — अग्नि तत्व — नाभि पर
  • 'वा' — वायु तत्व — हृदय पर
  • 'य' — आकाश तत्व — मस्तक पर

सरल विधि (यदि पूर्ण न्यास न आता हो)

कम से कम 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र बोलते हुए शिर, मुख, हृदय, नाभि और चरणों को क्रमशः स्पर्श करें और भगवान शिव को अपने समस्त अंगों में स्थापित करने का भाव रखें।

ध्यान रखें: न्यास की विधि गुरु से सीखना सर्वोत्तम है।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र शास्त्र, तंत्र शास्त्र, कर्मकांड विधि ग्रंथ
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