विस्तृत उत्तर
साधक परब्रह्म देवी के साथ अपने तादात्म्य को स्थापित करने हेतु 'जीव शुद्धि' करता है तथा 'न्यास' (Kara Nyasa and Anga Nyasa) की प्रक्रिया संपन्न करता है। न्यास का अर्थ है स्थापना करना।
इसमें विशिष्ट बीजाक्षरों (जैसे 'ऐं', 'ह्रीं', 'क्लीं', 'सौः') का उच्चारण करते हुए हाथ की उंगलियों और शरीर के विभिन्न अंगों (जैसे 'ऐं हृदयाय नमः') का स्पर्श किया जाता है।
यह प्रक्रिया साधक के भौतिक शरीर को मंत्रमय और देव-स्वरूप बना देती है।





