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देव स्वरूप से जुड़े सभी प्रश्न(3)

देव स्वरूप पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

पात्रता और शुद्धि

न्यास विधि क्या है — कर न्यास और अंग न्यास?

न्यास = स्थापना। बीजाक्षरों ('ऐं', 'ह्रीं', 'क्लीं', 'सौः') का उच्चारण करते हुए हाथ की उंगलियों और शरीर के अंगों (जैसे 'ऐं हृदयाय नमः') का स्पर्श। यह साधक के भौतिक शरीर को मंत्रमय और देव-स्वरूप बनाता है।

#न्यास विधि#करन्यास अंगन्यास#बीजाक्षर
तंत्र ध्यान

तंत्र साधना में ध्यान कैसे करें?

तंत्र ध्यान: विज्ञान भैरव — 112 विधियाँ। मुख्य: देव-रूप ध्यान (काली/भैरव का स्वरूप)। सोऽहम् श्वास-मंत्र (सर्वोच्च)। आज्ञा चक्र बिंदु ध्यान। नाद ध्यान। तंत्रालोक: 'अपनी आत्मा में विश्व देखना।'

#ध्यान#विधि#देव स्वरूप
जप ध्यान

मंत्र जप के दौरान ध्यान कैसे लगाएं?

जप-ध्यान: आसन-रीढ़ सीधी, तीन साँसें। आँखें बंद — इष्ट देव का स्वरूप (चरण से मुकुट तक)। मंत्र श्वास के साथ जोड़ें। जप बाद कुछ क्षण मौन। ध्यान न बने तो: नाम स्मरण ही पर्याप्त — कोशिश करना ही ध्यान है।

#ध्यान#एकाग्रता#देव स्वरूप
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