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तंत्र ध्यान📜 तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), विज्ञान भैरव तंत्र, कुलार्णव तंत्र1 मिनट पठन

तंत्र साधना में ध्यान कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

तंत्र ध्यान: विज्ञान भैरव — 112 विधियाँ। मुख्य: देव-रूप ध्यान (काली/भैरव का स्वरूप)। सोऽहम् श्वास-मंत्र (सर्वोच्च)। आज्ञा चक्र बिंदु ध्यान। नाद ध्यान। तंत्रालोक: 'अपनी आत्मा में विश्व देखना।'

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विस्तृत उत्तर

तंत्र में ध्यान की विधि तंत्रालोक और विज्ञान भैरव तंत्र में विस्तार से वर्णित है:

विज्ञान भैरव तंत्र

112 ध्यान विधियाँ। तंत्र ध्यान = शरीर, श्वास और मंत्र का एकत्र उपयोग।

तंत्र ध्यान की पाँच विधियाँ

1देव-रूप ध्यान

इष्ट देव (काली/भैरव/शिव) का स्वरूप — शस्त्र, आभूषण, वाहन — विस्तार से मन में।

2श्वास-मंत्र ध्यान (सर्वोच्च)

विज्ञान भैरव: 'श्वास लेते — सः, श्वास छोड़ते — हम्।' = 'सोऽहम्' = 'वह (शिव) मैं हूँ।'

3बिंदु ध्यान

आज्ञा चक्र (भौंहों के मध्य) पर एकाग्रता। नीला बिंदु या ज्योति।

4नाद ध्यान

भीतर की ध्वनि (अनाहत नाद) सुनना।

5श्मशान ध्यान (उन्नत)

मृत्यु का ध्यान — अहंकार विसर्जन। काली-अघोर परंपरा।

तंत्रालोक

स्वात्मनि विश्वं पश्येत्।' — अपनी आत्मा में समस्त विश्व देखना — तंत्र ध्यान का परम लक्ष्य।
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शास्त्रीय स्रोत
तंत्रालोक (अभिनवगुप्त), विज्ञान भैरव तंत्र, कुलार्णव तंत्र
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