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जप ध्यान📜 भगवद् गीता (6.13-14), पातंजल योग सूत्र — धारणा-ध्यान, भागवत पुराण2 मिनट पठन

मंत्र जप के दौरान ध्यान कैसे लगाएं?

संक्षिप्त उत्तर

जप-ध्यान: आसन-रीढ़ सीधी, तीन साँसें। आँखें बंद — इष्ट देव का स्वरूप (चरण से मुकुट तक)। मंत्र श्वास के साथ जोड़ें। जप बाद कुछ क्षण मौन। ध्यान न बने तो: नाम स्मरण ही पर्याप्त — कोशिश करना ही ध्यान है।

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विस्तृत उत्तर

जप में ध्यान लगाने की विधि भगवद् गीता और पातंजल योग सूत्र में वर्णित है:

पाँच चरणों में जप-ध्यान

चरण 1 — तैयारी

  • स्थान शांत, दरवाजा बंद, मोबाइल दूर
  • आसन पर बैठें, रीढ़ सीधी
  • तीन गहरी साँसें — मन को वर्तमान में लाएं

चरण 2 — देव आवाहन

आँखें बंद करके — इष्ट देव का स्वरूप मन में देखें:

  • चरण → घुटने → कमर → हृदय → मुख → मुकुट
  • स्वरूप को स्पष्ट और स्थिर करें

चरण 3 — मंत्र का संयोग

प्रत्येक मंत्र के साथ — देव का एक गुण या स्वरूप का ध्यान करें। माला के प्रत्येक मनके पर — एक पूर्ण ध्यान।

चरण 4 — श्वास के साथ

मंत्र को श्वास के साथ जोड़ें:

  • श्वास लेते हुए — 'ॐ नमः'
  • श्वास छोड़ते हुए — 'शिवाय'

चरण 5 — समर्पण

जप के बाद — माला रखें, हाथ जोड़ें, कुछ क्षण मौन रहें।

पातंजल योग (धारणा → ध्यान → समाधि)

देशबन्धश्चित्तस्य धारणा।' — मन को एक स्थान पर बाँधना धारणा है। जप में इष्ट देव पर धारणा → ध्यान।

यदि ध्यान न बने

भागवत — नाम स्मरण ही पर्याप्त है। ध्यान की कोशिश करना ही ध्यान है।

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शास्त्रीय स्रोत
भगवद् गीता (6.13-14), पातंजल योग सूत्र — धारणा-ध्यान, भागवत पुराण
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