विस्तृत उत्तर
जप में ध्यान लगाने की विधि भगवद् गीता और पातंजल योग सूत्र में वर्णित है:
पाँच चरणों में जप-ध्यान
चरण 1 — तैयारी
- ▸स्थान शांत, दरवाजा बंद, मोबाइल दूर
- ▸आसन पर बैठें, रीढ़ सीधी
- ▸तीन गहरी साँसें — मन को वर्तमान में लाएं
चरण 2 — देव आवाहन
आँखें बंद करके — इष्ट देव का स्वरूप मन में देखें:
- ▸चरण → घुटने → कमर → हृदय → मुख → मुकुट
- ▸स्वरूप को स्पष्ट और स्थिर करें
चरण 3 — मंत्र का संयोग
प्रत्येक मंत्र के साथ — देव का एक गुण या स्वरूप का ध्यान करें। माला के प्रत्येक मनके पर — एक पूर्ण ध्यान।
चरण 4 — श्वास के साथ
मंत्र को श्वास के साथ जोड़ें:
- ▸श्वास लेते हुए — 'ॐ नमः'
- ▸श्वास छोड़ते हुए — 'शिवाय'
चरण 5 — समर्पण
जप के बाद — माला रखें, हाथ जोड़ें, कुछ क्षण मौन रहें।
पातंजल योग (धारणा → ध्यान → समाधि)
देशबन्धश्चित्तस्य धारणा।' — मन को एक स्थान पर बाँधना धारणा है। जप में इष्ट देव पर धारणा → ध्यान।
यदि ध्यान न बने
भागवत — नाम स्मरण ही पर्याप्त है। ध्यान की कोशिश करना ही ध्यान है।





