विस्तृत उत्तर
न्यास की विधि में मंत्र के ऋषि, छंद, देवता और बीज को शरीर के विभिन्न अंगों पर स्थापित किया जाता है।
यह क्रिया शरीर में मंत्र की ऊर्जा को प्रवाहित करने के लिए गुरु परंपरा से सीखी जानी चाहिए।
न्यास में मंत्र के ऋषि, छंद, देवता और बीज को शरीर के विभिन्न अंगों पर स्थापित करते हैं — यह गुरु परंपरा से सीखना चाहिए।
न्यास की विधि में मंत्र के ऋषि, छंद, देवता और बीज को शरीर के विभिन्न अंगों पर स्थापित किया जाता है।
यह क्रिया शरीर में मंत्र की ऊर्जा को प्रवाहित करने के लिए गुरु परंपरा से सीखी जानी चाहिए।
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