विस्तृत उत्तर
मंत्र के पूर्ण प्रभाव को जाग्रत करने के लिए 'न्यास' (Nyasa) एक अनिवार्य तांत्रिक एवं वैदिक प्रक्रिया है। 'न्यास' का शाब्दिक अर्थ है 'स्थापित करना' या 'स्पर्श करना'।
इस प्रक्रिया में साधक मंत्र के विभिन्न अक्षरों और बीज-ध्वनियों को अपने शरीर के विभिन्न अंगों में मानसिक और शारीरिक रूप से स्थापित करता है।
यह प्रक्रिया साधक के भौतिक शरीर को मंत्र की दिव्य ऊर्जा को धारण करने योग्य एक पवित्र पात्र (Vessel) में परिवर्तित कर देती है।





