का सरल उत्तर
न्यास = 'स्थापित करना' — इसमें साधक मंत्र के अक्षरों और बीज-ध्वनियों को शरीर के विभिन्न अंगों में स्थापित करता है। यह भौतिक शरीर को मंत्र की दिव्य ऊर्जा धारण करने योग्य पवित्र पात्र बनाता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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