विस्तृत उत्तर
कर्मकांड में 'संकल्प' वह मानसिक और वाचिक उद्घोषणा (Declaration of Intent) है, जो अनुष्ठान के उद्देश्य, समय, स्थान, और कर्ता की पहचान (गोत्र, नाम) को ब्रह्मांडीय चेतना के साथ जोड़ती है।
संकल्प के बिना किया गया कर्म दिशाहीन माना जाता है।
अनुष्ठान के प्रथम दिन प्रमुख पुरोहित या साधक हाथ में जल, अक्षत (चावल), पुष्प और द्रव्य लेकर संकल्प पढ़ता है।
संकल्प का जल शिवलिंग के समीप ताम्रपात्र में छोड़ दिया जाता है।





