विस्तृत उत्तर
भागवत कथा शुरू करने से पहले कई शुद्धिकर्म और पूजाएँ बताई गई हैं। कथा आरंभ से एक दिन पहले वक्ता को क्षौर कर लेना चाहिए। आरंभ के दिन अरुणोदय में शौच से निवृत्त होकर स्नान करे और संध्या आदि नित्यकर्म संक्षेप में पूरा करे। कथा में विघ्न न आए, इसके लिये गणेशजी की पूजा करे। फिर पितरों का तर्पण कर पूर्व पापों की शुद्धि के लिये प्रायश्चित्त करे। मंडल बनाकर उसमें श्रीहरि की स्थापना की जाती है। श्रीकृष्ण की मंत्रोच्चार सहित षोडशोपचार पूजा होती है। इसके बाद भागवत पुस्तक की पूजा, नारियल रखकर नमस्कार, दीनता से स्तुति, फिर वक्ता की पूजा और संकल्प किया जाता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





