विस्तृत उत्तर
भागवत कथा की विधि में पुस्तक-पूजा के समय नारियल रखने का निर्देश है। धूप-दीप आदि से भागवत की पूजा करने के बाद पुस्तक के आगे नारियल रखकर नमस्कार किया जाता है। फिर सच्चे चित्त से स्तुति की जाती है कि श्रीमद्भागवत के रूप में साक्षात श्रीकृष्ण विराजमान हैं और शरण लेकर भवसागर से छूटना है। नारियल यहाँ पूजा और समर्पण की सामग्री के रूप में आता है। यह कोई अलग कथा नहीं, बल्कि भागवत पुस्तक को श्रीकृष्णस्वरूप मानकर उसके सामने विनम्रता से प्रणाम और संकल्प करने की विधि का भाग है। पूजा के बाद वक्ता पूजन और सात दिन का नियम-संकल्प आगे चलता है।
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