विस्तृत उत्तर
सुदर्शन चक्र को किसी भौतिक शक्ति से फेंका नहीं जाता था, बल्कि यह भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण के पवित्र संकल्प और इच्छा-शक्ति मात्र से ही सक्रिय होकर अपने लक्ष्य की ओर प्रस्थान करता था। यह धारक की सर्वोच्च मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है। अन्य दिव्यास्त्रों की तरह इसे मंत्रों से अभिमंत्रित करके या धनुष से छोड़ने की आवश्यकता नहीं थी। केवल विचार और संकल्प मात्र से यह अपने लक्ष्य की ओर स्वयं ही चला जाता था।
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