विस्तृत उत्तर
अनुष्ठान के समय साधक को अपने शरीर के विभिन्न अंगों (ललाट, वक्ष, भुजाओं) पर भस्म (विभूति) का लेपन करना चाहिए।
भस्म मृत्यु, वैराग्य और भौतिक जगत की नश्वरता का परम प्रतीक है।
भस्म लेपन करते हुए मंत्र का उच्चारण करने से साधक के शरीर के चारों ओर एक सुरक्षात्मक ऊर्जा क्षेत्र (Psychic Shield) का निर्माण होता है, जो किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्ति, मारक ग्रह के प्रभाव, और रोगों को शरीर में प्रवेश करने से रोकता है।





