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विस्तृत उत्तर
यदि रोग का कारण नकारात्मक शक्ति या तांत्रिक क्रियाओं का दुष्प्रभाव है, तो कालाष्टमी के दिन असितांग भैरव का ध्यान और जप करने से इन रुकावटों का निवारण होता है।
यह साधना तांत्रिक क्रियाओं के दुष्प्रभाव (जैसे उच्चाटन, सम्मोहन, मारण आदि) को नष्ट करने के लिए एक प्रकार के ब्रह्मास्त्र के रूप में कार्य करती है।
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