विस्तृत उत्तर
नीलकंठ अघोरास्त्र स्तोत्र में 'छिंदी छिंदी' का अर्थ है 'काट डालो'।
सर्प विष विनाश खंड में आठ प्रमुख नागों के नाम का उल्लेख करते हुए, उनसे उत्पन्न होने वाले विषों और कुलकादि दोषों को तुरंत 'छिंदी छिंदी' (काटने) की प्रार्थना की जाती है।
इसके अलावा, षट्कर्मों को 'दह छिंदी छिंदी' (जलाकर और काटकर) ध्वस्त करने का आदेश दिया गया है।





