विस्तृत उत्तर
नीलकंठ अघोरास्त्र स्तोत्र में 'हन हन' का अर्थ है 'मारो'।
यह उग्र शब्द स्तोत्र की आक्रामक और उन्मूलनकारी प्रकृति को दर्शाता है। भूत-प्रेत-डाकिनी शमन खंड में भगवान को इन्हें 'हन हन' (मार डालने) का निर्देश देते हुए उनका आह्वान किया जाता है।
इन उग्र बीजों का बार-बार प्रयोग यह स्पष्ट करता है कि यह पाठ एक आध्यात्मिक हथियार (अस्त्र) की तरह काम करता है।





