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विस्तृत उत्तर
नीलकंठ अघोरास्त्र स्तोत्र में 'दह दह' का अर्थ है 'जला दो'।
यह उग्र शब्द स्तोत्र की आक्रामक प्रकृति को दर्शाता है। स्तोत्र में षट्कर्मों को 'दह छिंदी छिंदी' (जलाकर और काटकर) ध्वस्त करने का आदेश दिया गया है।
इस प्रकार यह स्तोत्र शत्रु के तांत्रिक प्रयोगों और नकारात्मक ऊर्जाओं को जलाकर नष्ट करने की शक्ति रखता है।
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