विस्तृत उत्तर
रोग मुक्ति और आयु वृद्धि केवल बाहरी कर्मकांडों तक सीमित नहीं है, बल्कि आंतरिक ऊर्जा का शुद्धिकरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
श्वास पर नियंत्रण (प्राणायाम) आंतरिक शक्ति को जागृत करता है, जो रोग से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है।
साधना के दौरान, साधक को श्वास-प्रश्वास की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिसे योग और तंत्र में आंतरिक यज्ञ (यज) माना गया है।





