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मंत्र साधना📜 हठ योग प्रदीपिका, घेरण्ड संहिता, योग शास्त्र2 मिनट पठन

मंत्र जप में भ्रामरी प्राणायाम का क्या लाभ है?

संक्षिप्त उत्तर

भ्रामरी जप में: ध्वनि अभ्यास (नाद शुद्धि), तुरंत एकाग्रता, आज्ञा चक्र सक्रिय, तनाव मुक्ति, स्वर शुद्धि। जप से पहले 3-7 बार। 'म्म्म.../ॐ' गुंजन → कम्पन भ्रूमध्य अनुभव। जप बाद भी = गहन ध्यान। कान बंद करके।

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विस्तृत उत्तर

भ्रामरी प्राणायाम (भ्रमर = भौंरा — भौंरे जैसी गुंजन ध्वनि) मंत्र जप के लिए विशेष लाभकारी है:

मंत्र जप में लाभ

  1. 1ध्वनि अभ्यास: भ्रामरी में 'म्म्म...' गुंजन करना = मंत्र जप में नाद (ध्वनि) का अभ्यास। यह मंत्र उच्चारण की शुद्धता बढ़ाता है।
  1. 1एकाग्रता: भ्रामरी से मन तुरंत शांत और एकाग्र होता है। जप से ठीक पहले 3-5 बार भ्रामरी = गहन एकाग्र जप।
  1. 1आज्ञा चक्र सक्रियता: गुंजन की ध्वनि कम्पन (vibration) आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य) को सक्रिय करती है = अन्तर्दृष्टि, ध्यान गहरा।
  1. 1चिंता-तनाव मुक्ति: भ्रामरी तनाव, चिंता, क्रोध को तुरंत शांत करती है। शांत मन = प्रभावी जप।
  1. 1स्वर शुद्धि: नियमित भ्रामरी से कण्ठ (गला) शुद्ध होता है = मंत्र उच्चारण स्पष्ट और सुमधुर।

विधि: आँखें बंद → अंगूठों से कान बंद → 'म्म्म...' या 'ॐ' गुंजन करें → कम्पन को भ्रूमध्य में अनुभव करें। 3-7 बार।

क्रम: कपालभाति → अनुलोम-विलोम → भ्रामरी → शांत ध्यान → जप।

विशेष: भ्रामरी + ॐ उच्चारण = ध्यान की अत्यंत गहन अवस्था। जप के बाद भी भ्रामरी कर सकते हैं — ध्यान में उतरने के लिए।

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शास्त्रीय स्रोत
हठ योग प्रदीपिका, घेरण्ड संहिता, योग शास्त्र
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