विस्तृत उत्तर
भ्रामरी प्राणायाम (भ्रमर = भौंरा — भौंरे जैसी गुंजन ध्वनि) मंत्र जप के लिए विशेष लाभकारी है:
मंत्र जप में लाभ
- 1ध्वनि अभ्यास: भ्रामरी में 'म्म्म...' गुंजन करना = मंत्र जप में नाद (ध्वनि) का अभ्यास। यह मंत्र उच्चारण की शुद्धता बढ़ाता है।
- 1एकाग्रता: भ्रामरी से मन तुरंत शांत और एकाग्र होता है। जप से ठीक पहले 3-5 बार भ्रामरी = गहन एकाग्र जप।
- 1आज्ञा चक्र सक्रियता: गुंजन की ध्वनि कम्पन (vibration) आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य) को सक्रिय करती है = अन्तर्दृष्टि, ध्यान गहरा।
- 1चिंता-तनाव मुक्ति: भ्रामरी तनाव, चिंता, क्रोध को तुरंत शांत करती है। शांत मन = प्रभावी जप।
- 1स्वर शुद्धि: नियमित भ्रामरी से कण्ठ (गला) शुद्ध होता है = मंत्र उच्चारण स्पष्ट और सुमधुर।
विधि: आँखें बंद → अंगूठों से कान बंद → 'म्म्म...' या 'ॐ' गुंजन करें → कम्पन को भ्रूमध्य में अनुभव करें। 3-7 बार।
क्रम: कपालभाति → अनुलोम-विलोम → भ्रामरी → शांत ध्यान → जप।
विशेष: भ्रामरी + ॐ उच्चारण = ध्यान की अत्यंत गहन अवस्था। जप के बाद भी भ्रामरी कर सकते हैं — ध्यान में उतरने के लिए।




