विस्तृत उत्तर
कपालभाति (कपाल = खोपड़ी, भाति = प्रकाश/शुद्धि) एक शोधन क्रिया है जो मस्तिष्क और नाड़ी तंत्र को शुद्ध करती है।
मंत्र जप में कब करें
जप से पहले (सर्वोत्तम)
कपालभाति → अनुलोम-विलोम → शांत ध्यान (2-3 मिनट) → मंत्र जप। यही क्रम उत्तम है।
कपालभाति पहले क्यों
- 1शरीर शुद्धि: कपालभाति से फेफड़े, नाड़ियाँ, मस्तिष्क शुद्ध = ताजगी और स्फूर्ति।
- 2तमोगुण नाश: आलस्य, सुस्ती, नींद दूर — मन जागृत और सक्रिय।
- 3ऊर्जा वृद्धि: प्राण शक्ति तीव्र। जप में एकाग्रता बढ़ती है।
जप के बाद न करें
जप के बाद मन शांत और ध्यानस्थ होता है। कपालभाति (तीव्र श्वास क्रिया) इस शांति को भंग कर सकती है। अतः जप के बाद कपालभाति उचित नहीं।
विधि: सुखासन में बैठें → पेट को तीव्रता से अंदर खींचें (श्वास बाहर) → श्वास स्वतः अंदर आए → 30-60 बार = 1 राउंड। 3 राउंड करें। बीच में विश्राम।
सावधानी: उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी, गर्भवती, मासिक धर्म में कपालभाति न करें। खाली पेट ही करें।
क्रम: स्नान → कपालभाति (3 राउंड) → अनुलोम-विलोम (10-15 चक्र) → भ्रामरी (3-5 बार) → शांत ध्यान → संकल्प → मंत्र जप।





