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मंत्र साधना📜 हठ योग प्रदीपिका, घेरण्ड संहिता, योग शास्त्र2 मिनट पठन

मंत्र जप में कपालभाति प्राणायाम कब करना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

कपालभाति: जप से पहले करें (शरीर-मस्तिष्क शुद्धि, आलस्य नाश, ऊर्जा वृद्धि)। जप बाद नहीं (शांति भंग)। क्रम: कपालभाति → अनुलोम-विलोम → शांत ध्यान → जप। 30-60 बार × 3 राउंड। गर्भवती/हृदय रोगी वर्जित।

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विस्तृत उत्तर

कपालभाति (कपाल = खोपड़ी, भाति = प्रकाश/शुद्धि) एक शोधन क्रिया है जो मस्तिष्क और नाड़ी तंत्र को शुद्ध करती है।

मंत्र जप में कब करें

जप से पहले (सर्वोत्तम)

कपालभाति → अनुलोम-विलोम → शांत ध्यान (2-3 मिनट) → मंत्र जप। यही क्रम उत्तम है।

कपालभाति पहले क्यों

  1. 1शरीर शुद्धि: कपालभाति से फेफड़े, नाड़ियाँ, मस्तिष्क शुद्ध = ताजगी और स्फूर्ति।
  2. 2तमोगुण नाश: आलस्य, सुस्ती, नींद दूर — मन जागृत और सक्रिय।
  3. 3ऊर्जा वृद्धि: प्राण शक्ति तीव्र। जप में एकाग्रता बढ़ती है।

जप के बाद न करें

जप के बाद मन शांत और ध्यानस्थ होता है। कपालभाति (तीव्र श्वास क्रिया) इस शांति को भंग कर सकती है। अतः जप के बाद कपालभाति उचित नहीं।

विधि: सुखासन में बैठें → पेट को तीव्रता से अंदर खींचें (श्वास बाहर) → श्वास स्वतः अंदर आए → 30-60 बार = 1 राउंड। 3 राउंड करें। बीच में विश्राम।

सावधानी: उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी, गर्भवती, मासिक धर्म में कपालभाति न करें। खाली पेट ही करें।

क्रम: स्नान → कपालभाति (3 राउंड) → अनुलोम-विलोम (10-15 चक्र) → भ्रामरी (3-5 बार) → शांत ध्यान → संकल्प → मंत्र जप।

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शास्त्रीय स्रोत
हठ योग प्रदीपिका, घेरण्ड संहिता, योग शास्त्र
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