विस्तृत उत्तर
अनुलोम-विलोम (नाड़ी शोधन) प्राणायाम मंत्र जप की तैयारी में अत्यंत महत्वपूर्ण है:
मंत्र जप में उपयोग
- 1नाड़ी शुद्धि: अनुलोम-विलोम से इड़ा (बायीं) और पिंगला (दाहिनी) नाड़ियाँ शुद्ध और संतुलित होती हैं। शुद्ध नाड़ियाँ = मंत्र शक्ति का सही प्रवाह।
- 1मन शांत: श्वास नियंत्रण से मन शांत होता है। शांत मन = एकाग्र जप। 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' (योगसूत्र 1.2)।
- 1प्राण ऊर्जा: प्राणायाम से प्राण शक्ति बढ़ती है। प्राण + मंत्र = शक्तिशाली साधना। बिना प्राण के मंत्र = बिना ईंधन के अग्नि।
- 1सुषुम्ना जागरण: दोनों नाड़ियाँ संतुलित होने पर प्राण सुषुम्ना नाड़ी (केन्द्रीय) में प्रवेश करता है = गहन ध्यान और उच्च साधना सम्भव।
कब करें
मंत्र जप से ठीक पहले — 5-10 मिनट अनुलोम-विलोम करें। फिर 2-3 मिनट शांत बैठें। फिर जप आरम्भ।
विधि (संक्षिप्त): दाहिने अंगूठे से दाहिनी नासिका बंद → बायीं से श्वास लें → बायीं बंद (अनामिका से) → दाहिनी से छोड़ें → दाहिनी से लें → दाहिनी बंद → बायीं से छोड़ें = 1 चक्र। 10-15 चक्र।
क्रम: स्नान → आसन → प्राणायाम (अनुलोम-विलोम) → संकल्प → मंत्र जप।





