विस्तृत उत्तर
प्राणायाम और ध्यान से शिव की उपासना ब्रह्मा के आचरण द्वारा बताई गई है। ब्रह्मा ध्यानयुक्त मन से प्राणायामपरायण हुए और महेश्वर को अपने हृदय में धारण किया। इसके बाद वे अघोररूप परमेश्वर की शरण में गये और अघोर को ब्रह्मस्वरूप मानकर उनका ध्यान करने लगे। इसलिए यहाँ उपासना केवल बाहरी पूजा नहीं है, बल्कि मन की एकाग्रता, प्राणायाम, हृदय में महेश्वर का धारण और शरणागति से जुड़ी है।
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