विस्तृत उत्तर
धन, ऐश्वर्य और संतान की इच्छा से की जाने वाली उपासना का वर्णन किया गया है। पाठ कहता है कि जिनका स्वभाव रजोगुणी या तमोगुणी होता है, वे धन, ऐश्वर्य और संतान की कामना से भूत, पितर और प्रजापति आदि की उपासना करते हैं। इसका कारण यह बताया गया है कि उनका स्वभाव उन उपास्य शक्तियों से मिलता-जुलता होता है। यह कथन मोक्ष-इच्छु लोगों की उपासना से अलग रखा गया है। मोक्ष चाहने वाले विष्णु भगवान और उनके सत्त्वमय अंशों का भजन करते हैं, जबकि धन-संतान जैसे भौतिक लाभ की इच्छा वाले लोग भूत, पितर और प्रजापति आदि की ओर जाते हैं। इसलिए यह भाग उपासना को साधक की इच्छा और गुण-स्वभाव से जोड़कर समझाता है।
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