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तंत्र परंपरा📜 अघोर परंपरा, शैव तंत्र1 मिनट पठन

अघोर पंथ और तंत्र शास्त्र में क्या संबंध है?

संक्षिप्त उत्तर

अघोर = शैव तंत्र शाखा (वाम मार्ग)। शिव अघोर रूप। पंचमकार/श्मशान। 'सबमें शिव' = परम अद्वैत। सभी अघोरी तांत्रिक, सभी तांत्रिक अघोरी नहीं। बाबा कीनाराम (काशी)।

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विस्तृत उत्तर

अघोर = तंत्र शास्त्र का एक उन्नत मार्ग:

संबंध

  1. 1मूल: अघोर = शैव तंत्र की शाखा। शिव = अघोर (भयंकर नहीं)। अघोरी = शिव के अघोर रूप के साधक।
  2. 2वाम मार्ग: अघोर = वाम मार्ग तंत्र — पंचमकार, श्मशान, शव साधना।
  3. 3भैरव: भैरव = अघोर के इष्ट। काल भैरव = अघोर गुरु।
  4. 4अद्वैत: अघोर दर्शन = 'सबमें शिव' — शुद्ध/अशुद्ध भेद नहीं = परम अद्वैत। यह तंत्र का सर्वोच्च सिद्धांत।
  5. 5कापालिक: प्राचीन कापालिक → अघोर = विकास क्रम।

तंत्र vs अघोर: सभी अघोरी तांत्रिक, सभी तांत्रिक अघोरी नहीं। तंत्र = विशाल (दक्षिण+वाम+समय+कौल)। अघोर = तंत्र का एक उग्र मार्ग।

आधुनिक: बाबा कीनाराम = अघोर परंपरा (काशी)। अघोरेश्वर भगवान राम = 20वीं सदी।

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शास्त्रीय स्रोत
अघोर परंपरा, शैव तंत्र
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