विस्तृत उत्तर
अघोर = तंत्र शास्त्र का एक उन्नत मार्ग:
संबंध
- 1मूल: अघोर = शैव तंत्र की शाखा। शिव = अघोर (भयंकर नहीं)। अघोरी = शिव के अघोर रूप के साधक।
- 2वाम मार्ग: अघोर = वाम मार्ग तंत्र — पंचमकार, श्मशान, शव साधना।
- 3भैरव: भैरव = अघोर के इष्ट। काल भैरव = अघोर गुरु।
- 4अद्वैत: अघोर दर्शन = 'सबमें शिव' — शुद्ध/अशुद्ध भेद नहीं = परम अद्वैत। यह तंत्र का सर्वोच्च सिद्धांत।
- 5कापालिक: प्राचीन कापालिक → अघोर = विकास क्रम।
तंत्र vs अघोर: सभी अघोरी तांत्रिक, सभी तांत्रिक अघोरी नहीं। तंत्र = विशाल (दक्षिण+वाम+समय+कौल)। अघोर = तंत्र का एक उग्र मार्ग।
आधुनिक: बाबा कीनाराम = अघोर परंपरा (काशी)। अघोरेश्वर भगवान राम = 20वीं सदी।





