विस्तृत उत्तर
हाँ। यह समझना महत्वपूर्ण है कि किसी भी असाध्य रोग के उपचार में 'एक तत्व से बात नहीं बनती'।
मंत्र जप को प्रधान तत्व माना जाता है, लेकिन इसे पूरक तत्वों (गुण तत्व) द्वारा समर्थित किया जाना चाहिए।
आध्यात्मिक साधना को चल रहे भौतिक चिकित्सा उपचार (औषधि) के पूरक के रूप में प्रयोग करना चाहिए। सफलता के लिए आध्यात्मिक प्रयास और व्यवहारिक कर्म (चिकित्सा) दोनों ही आवश्यक हैं।





