विस्तृत उत्तर
अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र चलाना तो जानता था परंतु उसे लौटाना नहीं जानता था जिसके कारण अनर्थ हुआ। यह घटना इस बात का सबसे स्पष्ट प्रमाण है कि दिव्यास्त्रों को प्राप्त करना और उनका सही उपयोग करना दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण थे। योद्धा को न केवल अस्त्र चलाने का मंत्र बल्कि उसे वापस लेने का मंत्र भी सीखना होता था। यह इस बात की चेतावनी है कि आधा ज्ञान खतरनाक होता है और परम शक्ति के प्रयोग के लिए संपूर्ण ज्ञान और जिम्मेदारी आवश्यक है।
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