विस्तृत उत्तर
महाभारत युद्ध के उपरांत अश्वत्थामा ने पांडव वंश का समूल नाश करने के उद्देश्य से ब्रह्मास्त्र का प्रयोग अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ पर किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने योगमाया से सूक्ष्म रूप धारण कर उत्तरा के गर्भ में प्रवेश किया और अपने सुदर्शन चक्र से उस ब्रह्मास्त्र के प्रचंड तेज को रोककर अजन्मे परीक्षित की प्राण रक्षा की। यह घटना सुदर्शन चक्र की केवल संहारक ही नहीं बल्कि रक्षक शक्ति को भी उजागर करती है। यह भगवान की अपने भक्तों के प्रति करुणा और उनके वंश की रक्षा की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
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