विस्तृत उत्तर
न्यास के दो प्रमुख प्रकार हैं:
१. कर-न्यास (Karanyasa): उंगलियों और हथेलियों के विभिन्न भागों को मंत्र के साथ स्पर्श करना।
२. अंग-न्यास (Anganyasa): हृदय, सिर, शिखा, कवच, नेत्र और अस्त्र (कंधों और छाती) पर मंत्र की ऊर्जा को स्थापित करना।




