विस्तृत उत्तर
न्यास' का शाब्दिक अर्थ है 'स्थापित करना' या 'आरोपित करना'। कवच साधना में साधक मंत्रों और देव-नामों के माध्यम से अपने नश्वर शरीर के विभिन्न अंगों (मस्तक, नेत्र, भुजाएं, हृदय आदि) पर दिव्य शक्तियों और इष्ट-देवता के स्वरूपों का आवाहन एवं स्थापन करता है।





