विस्तृत उत्तर
पुरश्चरण की जप-संख्या का शास्त्रोक्त विधान — विस्तृत और प्रामाणिक:
मंत्रमहार्णव — मूल नियम
मंत्राक्षरसहस्रेण लक्षं जपेत् पुरश्चरे।
— पुरश्चरण में मंत्र के प्रत्येक अक्षर के लिए एक लाख जप करना पड़ता है।
प्रमुख मंत्रों की पुरश्चरण-संख्या
| मंत्र | अक्षर-संख्या | पुरश्चरण-जप |
|---|---|---|
| ॐ (प्रणव) | 1 | 1,00,000 |
| गं (गणपति) | 1 | 1,00,000 |
| हूँ हनुमते नमः | 5 | 5,00,000 |
| नमः शिवाय | 5 | 5,00,000 |
| ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः | 8 | 8,00,000 |
| ॐ नमो नारायणाय | 8 | 8,00,000 |
| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे | 9 | 9,00,000 |
| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय | 12 | 12,00,000 |
| गायत्री मंत्र | 24 | 24,00,000 |
| महामृत्युंजय | 33 | 33,00,000 |
*नोट: अक्षर-गणना परंपरा-भेद से भिन्न हो सकती है — गुरु से सुनिश्चित करें।*
व्यावहारिक गणना — प्रतिदिन कितना जप
यदि 1 माला (108 जप) = 5 मिनट, तो:
- ▸नित्य 1 घंटा जप = 12 माला = 1,296 जप
- ▸8 लाख पुरश्चरण = 8,00,000 ÷ 1,296 ≈ 617 दिन (लगभग 2 वर्ष)
- ▸नित्य 2 घंटा = 300 दिन (लगभग 1 वर्ष)
इसीलिए खंड-पुरश्चरण में प्रतिदिन अधिक जप — कम समय में पूर्ण करने के लिए।
कुलार्णव — न्यूनतम संख्या
कुलार्णव (15.70): 'न्यूनसंख्यं न कुर्वीत।' — निर्धारित संख्या से कम न जपें। यदि किसी दिन संख्या कम हो जाए — अगले दिन अधिक जपकर पूरा करें।
सम्पूर्ण पुरश्चरण की संख्या
मंत्रमहार्णव:
- ▸मुख्य जप: 'N' (निर्धारित)
- ▸हवन: N ÷ 10
- ▸तर्पण: N ÷ 100
- ▸मार्जन: N ÷ 1,000
- ▸ब्राह्मण भोजन: N ÷ 10,000
शारदातिलक का सत्य
संख्यापूर्तिर्न पर्याप्ता भावशुद्धिस्तु मुख्यतः।
— संख्या की पूर्ति पर्याप्त नहीं — भाव-शुद्धि मुख्य है।





