विस्तृत उत्तर
मार्जन: तर्पण की कुल संख्या का १०% अंश — १२५ बार। 'मार्जयामि' या 'अभिषिंचयामि' कहकर कुशा के माध्यम से स्वयं पर या रोगी के चित्र पर जल छिड़कना। यह शारीरिक एवं मानसिक दोषों को प्रक्षालित करता है।
मार्जन में तर्पण का 10% = 125 बार कुशा से स्वयं पर या रोगी के चित्र पर जल छिड़कते हैं ('मार्जयामि' या 'अभिषिंचयामि') — यह शारीरिक और मानसिक दोषों को प्रक्षालित करता है।
मार्जन: तर्पण की कुल संख्या का १०% अंश — १२५ बार। 'मार्जयामि' या 'अभिषिंचयामि' कहकर कुशा के माध्यम से स्वयं पर या रोगी के चित्र पर जल छिड़कना। यह शारीरिक एवं मानसिक दोषों को प्रक्षालित करता है।
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