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पुरश्चरण📜 मंत्रमहार्णव (पुरश्चरण पञ्चांग), कुलार्णव तंत्र (15.70-80), शारदातिलक तंत्र, तंत्रसार, अग्निपुराण (जप-होम अध्याय)2 मिनट पठन

पुरश्चरण के पांच अंग क्या हैं?

संक्षिप्त उत्तर

पुरश्चरण के पाँच अंग (मंत्रमहार्णव): जप (मूल — अक्षर × लाख), हवन (जप का 10वाँ — अग्नि में आहुति), तर्पण (हवन का 10वाँ — देव-ऋषि-पितर को जल), मार्जन (तर्पण का 10वाँ — जल-छिड़काव), ब्राह्मण अर्चन (मार्जन का 10वाँ — भोजन-दक्षिणा)। अनुपात: 10 लाख → 1 लाख → 10000 → 1000 → 100।

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विस्तृत उत्तर

पुरश्चरण के पाँच अंग — शास्त्रों में 'पुरश्चरण-पञ्चांग' के नाम से वर्णित:

मंत्रमहार्णव — पञ्चांग का श्लोक

जपो होमस्तर्पणं च मार्जनं ब्राह्मणार्चनम्।

पञ्चांगमेतत् पुरश्चरणस्य प्रकीर्तितम्।।'

— जप, हवन, तर्पण, मार्जन, और ब्राह्मण-अर्चन — ये पुरश्चरण के पाँच अंग हैं।

पाँचों अंगों का विस्तृत विवरण

1जप (मूल अंग — सर्वप्रमुख)

  • संख्या: मंत्र के अक्षर × 1,00,000
  • विधि: उपांशु या मानस जप सर्वोत्तम
  • काल: ब्रह्ममुहूर्त — प्रतिदिन एक निश्चित संख्या
  • महत्व: यह पुरश्चरण का प्राण है — शेष चारों अंग इसी पर आधारित हैं

2हवन (अग्नि-अंग)

  • संख्या: कुल जप का दशांश (10वाँ भाग)
  • सामग्री: देवता-अनुसार — तिल, जौ, घी, कमल-पुष्प, खीर
  • विधि: मंत्र के साथ 'स्वाहा' जोड़कर अग्नि में आहुति
  • महत्व: जप में जो अनजाने दोष हों — हवन उन्हें शुद्ध करता है। 'अग्नि' = साक्षी देवता

3तर्पण (जल-अंग)

  • संख्या: हवन का दशांश
  • विधि: हथेली से जल धारा गिराते हुए — देवता, ऋषि, पितर — तीनों को तर्पण
  • सामग्री: जल में तिल, जौ, कुश मिलाएं
  • महत्व: देवता, ऋषि, और पितरों को संतुष्ट करना — इनकी प्रसन्नता से मंत्र-सिद्धि सुगम होती है

4मार्जन (जल-छिड़काव)

  • संख्या: तर्पण का दशांश
  • विधि: कुश की शाखा से जल छिड़कना — स्वयं पर, साधना-स्थल पर, और देवता-मूर्ति पर
  • महत्व: शुद्धि और दोष-निवारण। जो दोष जप-हवन-तर्पण में रह जाएं — मार्जन उन्हें दूर करता है

5ब्राह्मण-अर्चन (अन्न-अंग)

  • संख्या: मार्जन का दशांश
  • विधि: ब्राह्मणों (या सुपात्र व्यक्तियों) को भोजन, वस्त्र, और दक्षिणा
  • महत्व: साधना का फल लोक तक पहुँचे — यही कर्म-योग है। दान के बिना साधना 'अपूर्ण' मानी जाती है

अनुपात का उदाहरण (10 लाख जप पर)

  • जप: 10,00,000
  • हवन: 1,00,000 आहुति
  • तर्पण: 10,000 बार
  • मार्जन: 1,000 बार
  • ब्राह्मण भोजन: 100 ब्राह्मण
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शास्त्रीय स्रोत
मंत्रमहार्णव (पुरश्चरण पञ्चांग), कुलार्णव तंत्र (15.70-80), शारदातिलक तंत्र, तंत्रसार, अग्निपुराण (जप-होम अध्याय)
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